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KANPURSAMACHAR-कानपुर समाचार

NEET 2020 Result: चाय वाले की बिटिया बनेगी डॉक्टर, कानपुर की कंचन ने पाई 22305 वीं रैंक

कानपुर में चाय का स्टॉल लगाने वाले प्रेम शंकर वर्मा और राम सखी वर्मा की बेटी कंचन ने नीट में 22305वीं रैंक हासिल की है।  बेटी की सफलता से गदगद प्रेमशंकर ने कहा कि अब चाय वाले की बिटिया डॉक्टर बनकर नाम रोशन करेगी।

रविदासपुरम में एक कमरे के घर में रहने वाले प्रेमशंकर कहते हैं कि बड़ी बेटी रजनी एनआईटी से इंजीनियरिंग कर रही है, बेटा चिंटल्स स्कूल में 10वीं कक्षा में है। कंचन ने मेडिकल की परीक्षा पहले प्रयास में ही पास की है।
प्रेमप्रकाश कहते हैं कि घर में सोने के लिए गद्दा तक नहीं है पर पढ़ाई करवाने में कोई ढिलाई नहीं बरती। उद्यमी सनी भाटिया और श्वेता भाटिया ने बच्चों की फीस भरने में पूरी मदद की है। कंचन न्यूरो सर्जन बनना चाहती हैं। कंचन कहती हैं कि पिता इंटर के बाद पुलिस की नौकरी करना चाहते थे, लेकिन आर्थिक संकट की वजह से नहीं कर पाए।


पूरे खानदान में अकेला डॉक्टर बनूंगा 
पूरे खानदान में दूर दूर तक कोई डॉक्टर की फील्ड में नहीं है। अकेला मैं हूं जो डॉक्टर बनूंगा। यह बात कहते हुए नीट मेें 6461 रैंक पाए मोहम्मद अरशद सिद्दीकी हंस पड़े। रामादेवी रहन वाले अरशद के पिता मोहम्मद अकरम प्राइवेट कर्मी और मां शबनम बेगम गृहिणी हैं।

गेस्ट्रो में स्पेशलिस्ट बनने वाले अरशद यूपी बोर्ड के छात्र रहे हैं। अरशद कहते हैं कि हिंदी मीडियम का होने की वजह से कई बार परेशानी का सामना किया। शुरुआत में न्यू लाइट इंस्टीट्यूट से सर एसपी सिंह हिंदी में स्टडी मैटीरियल उपलब्ध कराते थे, लेकिन बाद में उन्होंने अंग्रेजी सुधारने के लिए प्रेरित किया। 

बहन के नक्शे कदम पर चले तन्मय
नीट में 9078 रैंक लाने वाले तन्मय सचान ने अपनी बहन और मामा के नक्शे कदम पर ही मेडिकल लाइन में जाने का मन बनाया। तनमय की बहन अनामिता जीएसवीएम से मेडिकल की पढ़ाई कर रही है और मामा डॉ. एसके कटियार आई सर्जन हैं।
तन्मय कहते  हैं कि लॉकडाउनकी वजह से काफी परेशान रहा, चाहता था कि जितनी जल्दी हो सके परीक्षाएं हो जाएं। एकरूपता आती जा रही थी। रतनलाल नगर निवासी तनमय के पिता जयप्रकाश बिजनेसमैन और मां मालती सचान गृहिणी है।

कार्डियोलॉजिस्ट बनाना चाहते हैं प्रत्युष
कंपनी बाग निवासी प्रत्युष कटियार का सपना कार्डियोलॉजिस्ट बनने का है। पिता रवि शंकर शुगर टेक् नोलॉजिस्ट हैं, वह पुणे में तैनात हैं और मां विदुषी कटियार सीएसए में कंप्यूटर प्रोग्रामर है।

11727 रैंक पाने वाले प्रत्युष कहते हैं कि कोरोना काल में नीट की तैयारी कर रहे छात्र परेशान हुए, परीक्षाएं लेट होने की वजह से मनोबल जहां टूट रहा था, वहीं हर ओर हो रही डॉक्टर की तारीफ से मन गदगद भी हो रहा था। यह सच है कि कोरोना काल में डॉक्टरों की भूमिका के बाद मन में डॉक्टर बनने की इच्छा दृढ़ हो गई।

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